Selections from the Writings of the Báb
Hindi ·
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महिमा हो तेरी, हे ईश्वर! तू वह ईश्वर है जो सभी वस्तुओं से पहले अस्तित्व में था, जो सभी वस्तुओं के पश्चात भी अस्तित्व में रहेगा तथा सभी वस्तुओं के परे कायम रहेगा। तू वह ईश्वर है जो सब कुछ जानता है तथा सभी वस्तुओं पर सर्वाच्च है। तू वह ईश्वर है जो सभी वस्तुओं से दया का व्यवहार करता है, जो सभी वस्तुओं के बीच न्याय करता है और जिसकी दिव्य-दृष्टि सभी वस्तुओं में समाये हुए है। तू ईश्वर मेरा स्वामी है, तू मेरी स्थिति से अवगत है, तू मेरे आंतरिक एवं बाह्य अस्तित्व का साक्षी है।
मुझे एवं उन अनुयायियां को, जिन्होंने तेरे आह्वान का प्रत्युत्तर दिया है, क्षमा प्रदान कर। जो कोई भी मुझे दुःख देने की इच्छा रखे अथवा मेरा बुरा चाहे उसके अनिष्ट के विरुद्ध तू मेरा पर्याप्त सहायक बन। वस्तुतः, तू समस्त सृजित वस्तुओं का स्वामी है। तू सभी के लिये पर्याप्त है, जबकि तेरे बगैर कोई भी आत्मनिर्भर नहीं।
अनासक्ति BB00522REF
हे स्वामी! मैं तेरी शरण में आना चाहता हूँ, और तेरे समस्त चिन्हों की ओर मैं अपना हृदय लगाये हुए हूँ।
हे स्वामी! चाहे यात्रा में हूँ या घर में, और अपने व्यवसाय अथवा अपने कार्य में; मैं अपनी सम्पूर्ण आस्था तुझमें ही रखता हूँ।
तब मुझे अपनी पर्याप्त सहायता प्रदान कर जो मुझे समस्त वस्तुओं से स्वतंत्र कर दे, हे तू जो अपनी दया में सर्वोत्तम है!
हे स्वामी! मुझे मेरा अंश प्रदान कर, जैसा तू चाहता है और जो भी तूने मेरे लिए नियत किया है उसमें मुझे संतुष्ट कर दे। आदेश देने का सम्पूर्ण अधिकार तेरा ही है।
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हे ईश्वर हमारे स्वामी! अपनी कृपा के माध्यम से उन सब से हमारी रक्षा कर जो तेरे लिये घृणित है और हमें कृपापूर्वक वह प्रदान कर जो तेरे लिये शोभनीय है। हमें अपनी उदारता का और अधिक भाग दे और हमें आशीर्वाद प्रदान कर। हमने जो कुछ किया है उसके लिये हमें क्षमा कर और हमारे पापां को धो डाल तथा अपनी कृपापूर्ण क्षमाशीलता के द्वारा हमें क्षमा कर। वस्तुतः तू सर्वादात्त, स्वयंजीवी है।
तेरा प्रेममय विधान स्वर्ग में और धरती पर सभी सृजित वस्तुओं को घेरे हुए है और तेरी क्षमा समस्त सृष्टि को पार कर गई है। प्रभुसत्ता तेरी है; तेरे ही हाथ में सृजन एवं प्रकटीकरण के साम्राज्य हैं; अपने हाथ में तू समस्त सृजित वस्तुओं को धारण किये हुए है तथा तेरी ही मुठ्ठी में क्षमाशीलता के नियत परिमाण हैं। अपने सेवकां में से तू जिसे चाहे उसे क्षमा कर देता है। वस्तुतः तू सदा क्षमाशील, सर्वप्रेममय है। तेरे ज्ञान से कुछ भी बाहर नहीं रह सकता और ऐसा कुछ भी नहीं है जो तुझ से छिपा है।
हे ईश्वर हमारे स्वामी! अपनी शक्ति के सामर्थ्य से हमारी रक्षा कर, हमें अपने उमड़ते हुए अद्भुत महासागर में प्रवेश करा और हमें वह प्रदान कर जो तेरे लिये अति शोभनीय हो।
तू परम शासक, बलशाली, कर्ता, उदात्त, सर्वप्रेममय है!